हेमकुण्ड बद्रीनाथ केदारनाथ यात्रा वृतान्त
भाग ५
जून १०, २०१९

Quick रिकैप - हम निकले है 9 दिनी बद्रीनाथ हेमकुण्ड यात्रा पर आज यात्रा का चौथा दिन है, कल हम निकले थे चोपटा-तुंगनाथ होते हुए पीपलकोटी के लिए लेकिन पहुंच गए केदारनाथ ये सब कैसे और नाटकीय परिस्थितयों में हुआ जानने के लिए पीछे के एपिसोड्स इस पेज https://chandersantani.blogspot.com/?m=1 पर विसिट कर पढ़ सकते हैं.
रात को हम केदार बाबा के दर्शन कर चुके थे और आज हमारी अगली मंजिल पीपलकोटी, जो कि बद्रीनाथ पहुँचने के लिए एक पड़ाव मात्र था, १७५ दूर थी, सो सुबह जल्दी नित्यकर्म से निवृत हो ६ बजे निकल पड़े, और क्यूंकि हमें नीचे जल्दी पहुंचना था सोचा घोड़े कर लिए जांए लेकिन जेब चेक करी तो कल जो ब्लैक देके कार्ड स्वैप कर १००००, उस आदमी से सोनप्रयाग में लिए थे उसमे से ७५०० तो कल घोड़ो पर स्वः हो चुके थे और कुछ gmvn के टेंट के किराये और रात के खाने में और जो शेष था वो वापसी के घोड़ो के लिए काफी नहीं था, सो घोड़े वाले को बोला भाई आपका बिल हम नीचे चल फिर कार्ड स्वैप कर देंगे, वो बड़ी मुश्किल से तैयार हुआ, इसलिए ये बात गांठ बाँध लें कि पहाड़ो में डिजिटल इंडिया का भरोसा न करे.
जैसा की पिछले भाग में बताया घुड़सवारी बड़ी कष्टकारी होती है, नीचे उतरते हुए ये और भी कष्टकारी था सो रामवाडा, जो कि हाफवे था घोड़ेवाले से मोलभाव कर जेब में बचे पैसो से भुगतान कर दिया और पैदल ही चल दिए करीब ११.०० बजे नीचे गौरीकुंड पहुँच कर मन्दाकिनी नदी में जी भर के नहाया हालाँकि पानी बहुत ही ठंडा था इसलिए वहां नहा रहे बाबाओं से उनके लोटे कमंडल लेके उस से नहाया, बाकी नदी में घुस के नहाने की हिम्मत न हुई और नहाने के बाद हम लोग फिर जीप में सवार हो सोनप्रयाग पहुंचे. रास्ते में हमने मन्दाकिनी वासुकी नदी का संगम देखा. और उस समय लगभग १२ बज चुके थे, जेब लगभग खाली थी, वो कार्ड स्वैप के बदले पैसे देने वाला बन्दा भी आज गायब था, बचे खुचे कैश से पेमेंट कर खाना खाया और चल दिए मार्च पास्ट करते हुए वहां जहाँ कार पार्क करी थी, जो कि लगभग २ किलोमीटर दूर था.
सोनप्रयाग की अधिकृत पार्किंग का नज़ारा ऐसा था कि जहाँ तक नजर जाये वाहन ही वाहन थे, रोडों का विकास प्रकृति और पर्यावरण का कितना नुकसान कर रहा है ये यहाँ देखा जा सकता है, समुद्र तल से १८२९ मीटर होने के बावजूद तापमान मैदानों को टक्कर देते हुए ३७ डिग्री को छू रह था, ऐसी भीषण गर्मी में २ km भी २० km का अहसास दिला रहे थे, एक तो चलने तक की जगह नहीं थी वाहनों के बीच से रास्ता बना बना के चलना पड़ रहा था, और अधिकृत पार्किंग के पास का नज़ारे ने तो दिल दहला दिया, पार्किंग के ठेकेदार ने या लोकल लोगों रोड के किनारे पार्क की हुई कारों के पहियों की हवा निकाल दी थी, महंगे महंगे साइड मिरर तोड़ दिए थे, मुझे अपनी कार की चिंता लगने लगी, हम तेज कदम बढ़ाते अपनी कार के पास पहुंचे, उसे सही सलामत देख जान में जान आई, हमें कार इस तरह क्यों पार्क करनी पड़ी, भाग ३ में पढ़ सकते हैं. चूंकि हमारी कार अधिकृत पार्किंग से काफी दूर थी शायद इसलिए बच गई, मुझे उन लोगों, जिनकी कारें तोड़ दी गई थी, के बारे ये सोच के कुछ तो हो रह था, जब वे वापिस आयेंगे वो और उनका परिवार कितना परेशान होगा.
उपरोक्त सब से ये बातें सामने आई जो केदार यात्रा करते समय ध्यान रखनी चाहिए-
1. सबसे पहले मई जून का माह अवॉयड करें, तो आपका ये तर्क हो सकता है की बचों की छुट्टियाँ तो मई जून में होती है तो मेरा कहना है कि ये स्थान बच्चों के लिए नहीं है, बच्चोंको हॉलिडे करानी है तो कोई और स्थान चुनिये
2. ट्रेक प्रारम्भ करने एक दिन पूर्व ही पहुँच जाएँ, और अगर अपनी गाड़ी से जा रहें है तो किसी पार्किंग सुविधा वाली होटल में रुकें या सोनप्रयाग से पहले ही किसी स्थान पर रुक कर लोकल conveyance से गौरी कुण्ड तक जाएँ जहाँ से ट्रेक प्रारंभ होता है
3. ट्रेक सुबह ही स्टार्ट करें
4. पर्याप्त कैश रखें
5. और अगर आपके साथ बड़े बूढ़े या बच्चे हैं तो हो सके तो पूर्व बुकिंग कर हेलीकाप्टर से जाएँ क्योंकि पैदल चढ़ाई बहुत ही कठिन और कई बार दुर्गम भी है, और एक घोड़े, डोली का खर्चा भी लगभग हेलीकाप्टर के किराये जितना ही पड़ जाता है
6. पर्याप्त मात्रा में गरम कपडे और अच्छे क्वालिटी के रेनकोट रखें, टार्च, पर्याप्त फ़ोन बैट्री बैकअप और परिवार के हर सदस्य जिसके पास फ़ोन है बीएसएनएल की सिम, एक प्राथमिक उपचार मेडिकल किट
7. सबसे महत्वपूर्ण ट्रेकिंग के लिए पिठू बैग ही लें, स्लिंग बैग, ट्राली बैग नहीं
तो मित्रो हम लगभग २ बजे गाड़ी लेके निकल लिए पीपलकोटी के तरफ हमें करीब 146 km का सफ़र करना था और गुगल मैप पे ESTIMATED टाइम आ रहा था 5 घन्टे 45 मिनट. ये रास्ता हमें वापस रुद्रप्रयाग होते हुए NH7 पर ले जा रहा था लेकिन इस रास्ते पर जगह लाल के निशान आ रहे थे मतलब ट्रेफिक जैम.
फाटा पर रुककर हमने एटीएम से कैश निकला. फाटा के पास फिर हम ट्रेफिक में फंसे estimated टाइम बढ़ता ही जा रहा था. गुप्तकाशी तक २७ km कवर करने के लिए हमें २ घंटे लग गए. थककर हम गुप्तकाशी पर चाय पीने रुके तो बद्रीनाथ से आ रही एक बस भी वहीँ खड़ी थी और केदार जा रही थी, उसके ड्राईवर ने बताया कि कुंद गाँव के खत्म होने के बाद पुल क्रास करते ही एक रास्ता लेफ्ट मे SH१०७A ले लेना, वो २० km लम्बा तो है पर रोड बहुत ही अच्छा और लगभग जीरो ट्रेफिक वाला है सो हमने वही रास्ता लिया और सचमुच रोड सिंगल लेन पर बहुत ही अच्छा और सुन्दर नजारों से भरा था और हमारे आश्चर्य और ख़ुशी का कोइ ठिकाना नहीं रहा जब एक दिशासूचक बोर्ड बता रहा था की हम चोपता से होकर गुजरेंग. क्योंकि हमने चोपता ड्रॉप करके ही केदार बाबा का रुख किया था, और भोलेनाथ ने वापस उसी मार्ग पर भेज दिया था तो ख़ुशी स्वाभाविक थी, कुछ ही देर में हम चोपता पहुँच गए और यहाँ के दूर तक फैले घांस के मैदान जिसे स्थानीय बोली में बुग्याल कहा जाता है देख के मन प्रसन हो गया, भले ही हम वहाँ ज्यादा न रुक पाए पर प्रण किया दोबारा लौट के इस क्षेत्र में जरुर आएंगे, यहाँ पर रुक कर हमने चाय जरुर ली और यहाँ पर लगभग ५.३० बज चुके थे, आगे ८६ किलोमीटर चलना था, estimated टाइम आ रहा था पीपलकोटी के लिए ३ घंटे मतलब ८.३०. लेकिन आगे रास्ता अच्छा बगैर ट्रैफिक के मिला तो चमोली गोपेश्वर तक का ६२ km कर रास्ता हमने ६.४५ तक तय कर लिया, यहाँ से NH7 लग गया और कुछ अच्छा पेच मिला तो 7.15 बजे हम पीपलकोटी पहुँच गए और अभी भी उजाला लग रहा था तो सोचा थोडा और खींच लेते है और हमें मजबूरन ३० km और खींचना पड़ा क्योंकि कोई अच्छा होटल नहीं दिख रहा था, आखिर जोशीमठ से ६ km पाहिले, रोड पर ही उलटे हाथ पर रघुबीर लॉज दिखा रूम साफ़ सुथरे थे और दाम/किराया भी वाजिब था एक रात गुजारने के लिए. नीचे ही रेस्तौरेंट भी था, हाथ मुहँ धोके खाना खाने आ गए, काफी अच्छा स्वादिष्ट भोजन था, और लगभग १० बजे हम सोने की स्तिथि में थे. हमारा अगला पड़ाव बद्रीनाथ था जो किए यहाँ से मात्र ४८ किलोमीटर था.
कुल मिलाकर प्रतिदिन हम trarget से ज्यादा अचीव कर रहे थे, आज का अचीवमेंट ३० km था. लेकिन कवि दिनकर ने कहा है -

ढीली करो धनुष की डोरी, तरकस का कस खोलो ,
किसने कहा, युद्ध की वेला चली गयी, शांति से बोलो?
किसने कहा, और मत वेधो ह्रदय वह्रि के शर से,
भरो भुवन का अंग कुंकुम से, कुसुम से, केसर से?

सो अभी समर शेष है, आगे का समर, आगे का सफ़र अगले भाग में

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