हेमकुण्ड बद्रीनाथ केदारनाथ यात्रा वृतान्त

भाग एक
अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान, भोपाल से mbbs कर रहे पुत्र का जैसे ही मई २०१९ के प्रथम सप्ताह में परीक्षा टाईमटेबल आया और साथ ही छुटियों का पता चला, घुमककड़ी का कीड़ा जाग उठा, वैसे तो पुत्र की छुटियों का तो बहाना था हम पति पत्नी का घुमककड़ी का कीड़ा तो कभी भी जाग उठता है, अभी मार्च २०१९ में तो रामेश्वरम कोदैकनाल की अविस्मर्णीय यात्रा की थी सो कहाँ जाया जाये माथापची चालू हो गयी, बच्चे की उत्तर में कहीं बर्फ देखने की इच्छा थी और कुछ एडवेंचर की भी और हमारी कुछ लगे हाथों तीरथ की सो सोचा गया कि हेमकुण्ड साहिब के और फूलों की घाटी के साथ हरिद्वार में पाप धो लिए जाएँ, अंतरजाल(इन्टरनेट) पर खोजबीन चालू हुई 7 जून २०१९ शुक्रवार, चूँकि द्वितीय शनिवार बैंकों की छुटी होती है, को निकलना तय हुआ. और चूँकि पत्नी रेलवे में है तो अधिकतर रेल से ही जाना पसंद करते है सो तुरत फुरत में भोपाल से दिली और दिली से हरिद्वार की रेल बुकिंग तो करवा ही ली बाकी आगे की यात्रा के लिए खोजबीन इन्टरनेट पर जारी रही. पता पड़ा कि हरिद्वार से हेमकुण्ड साहिब जाना है तो गोबिंदघाट तक तो वाहनगम्य रास्ता, २९० KM तथा उसके बाद दो चरणों में प्रथम दिन क्रमशः घांघरिया १४ और दुसरे दिन वहां से ६ किलोमीटर हेमकुण्ड साहिब के लिये ट्रेकिंग है. घंगारिया से एक रास्ता फूलों की घाटी के लिए ८ किलोमीटर आना जाना एक अलग ट्रेक है सो एक दिन उसके लिए अलग. हमारे हाथ में १६ जून तक कुल ८ दिन थे. हिसाब लगाया तो :

८ जून को सुबह हरिद्वार पहुंचे गंगा स्नान और शाम की आरती देखे और रात को विश्राम
9 जून को हरिद्वार से गोविन्द घाट के लिए निकले २९० KM कवर करके रात को गोविन्द घाट में विश्राम
१० जून गोबिंद घाट से घंगारिया १४ KM का ट्रेक
११ जून घंगारिया से हेमकुण्ड साहिब १२ कम आना जाना ट्रेक और दर्शन पश्चात् घंगारिया में विश्राम
१२ जून घंगारिया से फूलों की घाटी ८ KM आना जाना रात को घंगारिया में विश्राम
१३ जून वापसी घंगारिया से गोविन्द घाट १४ KM का ट्रेक रात्रि विश्राम
१४ जून को गोविन्द घाट से ऋषिकेश २५० KM शाम की आरती और रात को विश्राम
15 जून को हरिद्वार से भोपाल ट्रेन द्वारा

सो 15 जून को रात्रि की ट्रैन से हरिद्वार से दिली की और १६ जून को भो दिली से भोपाल की वापसी की टिकिट करवा ली. अब हरिद्वार से गोविन्द घाट कैसे जाया जाये, इसकी पड़ताल करी तो मालूम पड़ा की हरिद्वार से अगर टैक्सी से जाया जाये तो पता पड़ा कि टैक्सी दोनों तरफ से करानी पड़ेगी और 9 जून से 15 जून तक ४५०० प्रतिदिन देना पड़ेगा. हिसाब लगाया तो देखा 9 की रात्रि से १३ जून तक टैक्सी तो फालतू गोविन्द घाट में खडी रहेगी और बिना मतलब के उसको ४ दिन भाडा और ड्राईवर के प्रति नाईट रु २००/- अलग, सो हमें यह बड़ा अखर रहा था. प्रति सीट की हिसाब से भी गाड़िया जाती है ऐसा पता चला पर ट्रेवेल एजेंसीयों से बात करने पर पता चला कि ये पीक सीजन है सो प्रति सीट से गाड़ी नहीं मिलेगी, लेनी तो आपको पूरी गाड़ी पड़ेगी. लेकिन हमें इतने दिन का फालतू किराया देना अच्छा नहीं लग रहा था. हम उधेड़बुन में लगे रहे. कुछ और अनुसन्धान करने पर पता चला की हम सीजन की बिलकुल शुरुआत में जा रहे थे और फूलो की घाटी तो जुलाई अगस्त में ही फलती है सो अभी वहां जाना व्यर्थ है अब हम मन तो हेमकुण्ड साहिब का बना चुके थे और पूरा प्रोग्राम, बच्चे जिसका नाम भावेश है, की छुटियो के इर्दगिर्द बुना था सो हमने फूलों की घाटी को निरस्त करने का मन बनाया, अब हमारे पास अब एक दिन एक्स्ट्रा हो रहा था तो हमने सोचा की चलो आस पास और क्या है इसको एक्स्प्लोर किया जाये तो पता पड़ा की बद्रीनाथ बहुत ही पास है सो पहले ही हमारे साथ वो टैक्सी वाली समस्या तो थी ही सो दुसरे विकल्प देखे तो मालूम पड़ा की हरिद्वार से तडके सुबह बस निकलती है जो सीधे बद्रीनाथ तक जाती है लेकिन ११ से १२ घंटे लेती है और इतना समय बस में और वो भी घुमावदार रास्तों पर सो हमारी हिम्मत जवाब दे रही थी, फिर भी मरता न किया करता जी कड़ा कर उतरांचल परिवहन की ऑनलाइन बुकिंग सुविधा से बस बुक कर दी 9 जून सुबह ५.३० बजे की किराया रु ५३० प्रति व्यक्ति और वापसी 15 जून को जोशीमठ से बोर्डिंग करके. सो कुल खर्चा लगभग रु ३२००/- जहाँ टैक्सी में लगभग रु २१००० पड़ता. सो प्रोग्राम पलट गया

८ जून को सुबह हरिद्वार पहुंचे गंगा स्नान और शाम की आरती देखे और रात को विश्राम
9 जून को हरिद्वार से बद्रीनाथ के लिए निकले ३१६ KM कवर करके रात को बद्रीनाथ में विश्राम
१० जून बद्रीनाथ में दर्शन पूजा पिंड दान, भारत के अंतिम गाँव माना गाँव भ्रमण जहाँ वेद व्यास और गणेश जी ने महाभारत की कही और लिखी, सरस्वती नदी का उद्गम स्थल है कर रात को बद्रीनाथ में विश्राम
११ जून बद्रीनाथ से गोबिंद घाट बस द्वारा तथा गोबिंद घाट से घंगारिया १४ KM का ट्रेक पश्चात् घंगारिया में विश्राम
१२ जून घंगारिया से हेमकुण्ड साहिब १२ किमी आना जाना ट्रेक और दर्शन पश्चात् घंगारिया में विश्राम
१३ जून वापसी घंगारिया से गोविन्द घाट १४ KM का ट्रेक रात्रि विश्राम
१४ जून को गोविन्द घाट से ऋषिकेश २५० KM शाम की आरती और रात को विश्राम
15 जून को हरिद्वार से भोपाल ट्रेन द्वारा

लेकिन अब ट्विस्ट देखिये. मार्च में हमने दक्षिण की यात्रा के दौरान भोपाल से Coimbatore जो सबसे लम्बी दुरी थी वायुयान से की बाकी आंतरिक यात्रा के लिए हमने ज़ूम सेल्फ ड्राइव कार लेके गूगल मैप की माता के सहयोग दक्षिण के कई दर्शनीय स्थल देखते हुए रामेश्वरम के दर्शन कर वापिस कोइम्बतोर से भोपाल वायुयान द्वारा आये थे. चूँकि ज़ूम कार मैं कई बार उपयोग कर चुका था और इस बार भी मेरा यही मन था कि दिली से ज़ूम कर ली जाये परन्तु पत्नी मीना और भावेश ऊँचे घुमावदार रास्तों के कारण सेल्स ड्राइव को सहमत नहीं थे सो यह विचार त्याग दिया गया था. उपरोक्त सब बुकिंग्स भी हो चुकी थी बद्रीनाथ में भी yatradham.org की साईट से Kedarnath Badrinath Temples Committee (BKTC) BKTC - Rest House, Badrinath, Uttarakhand - 246422. बुक कर दिया था.
अब ट्विस्ट ये कि ज़ूम कार की तरफ से ५०% छूट के साथ बाकी ५०% भी कैशबैक, जो कि आगे की बुकिंग्स में काम आयेगा की ऑफर आई, और मेरा मन डोल उठा, और लॉन्ग ड्राइवस मुझे तो बहुत पसंद है, मैंने ये ऑफर परिवार से डिस्कस की वो पहिले ही १२ घटे की बस यात्रा से सहमे हुए थे, थोड़ी नानुकुर के बाद सहमत हो गए और हमने ये ऑफर लपक ली और देखिये १२६६ किलोमीटर और ८ दिन की यात्रा हमें लगभग १३०० रु में पड़ी. और कार अपने हाथ में आ जाने से देखिये कार्यक्रम में क्या रंग खिलते है.
अब नये डेवलपमेंट्स के कारण दिली से हरिद्वार और वापसी की ट्रेन बुकिंग्स कैंसिल की रेलवे पास था सो कुछ नुकसान नहीं हुआ. हरिद्वार बद्रीनाथ हरिद्वार बस की बुकिंग कैंसिल की नोमिनल नुकसान क्योंकि समय रहते कैंसिल कर दी. अब चूँकि हाथ में स्टेरिंग आ चुका था सो कार्यक्रम पर पुनः विचार चालू हुआ और गूगल बाबा की मदद ली. हमारी ट्रेन दक्षिण एक्सप्रेस सुबह ४ बजे दिली पहुँच जाती है और इसका समय पाबन्दी कर रिकॉर्ड एक्सेसल्लेंट है अतः कार्यक्रम इस तरह से तय हुआ

८ जून सुबह ५ ३० के करीब ज़ूम कर का पिक अप १०. ३० बजे के करीब हरिद्वार पहुंचे गंगा स्नान नास्ता कर श्रीनगर को प्रस्थान The route will be Haridwar-->Rishikesh (30kms)-->Dev Prayag(70kms)-->Srinagar(30kms).A total of 130KMS. Here we plan to rest for the night.
9 जून Again starting early in the morning we plan to leave for जोशीमठ.
The route will be Srinagar-->Rud Prayag (35kms)-->Chopta (21kms)--> Tungnath trek (10KMS TO AND FRO)-->Pipalkoti (102kms)-->a total of 168 kms रात को विश्राम
१० जून Again starting early in the morning we plan to leave for Badrinath
The route will be --> Joshimath (35kms)-->Badrinath (46 kms)--> a total of 81 kms दोपहर के करीब बद्रीनाथ पहुँच कर बद्रीनाथ में दर्शन पूजा पिंड दान रात को बद्रीनाथ में विश्राम
११ जून भारत के अंतिम गाँव माना का भ्रमण, यहाँ वेद व्यास और गणेश जी ने महाभारत की कही और लिखी उनकी गुफाएँ, सरस्वती नदी का उद्गम स्थल है . शाम तक बद्रीनाथ से गोविन्दघाट पहुँच कर रात को विश्राम
१२ जून तड़के ५ बजे गोबिंद घाट से घंगारिया १४ KM का ट्रेक पश्चात् घंगारिया में विश्राम
१३ जून तडके घंगारिया से हेमकुण्ड साहिब १२ किमी आना जाना ट्रेक और दर्शन पश्चात् घंगारिया में विश्राम
१४ जून को वापसी घंगारिया से गोविन्द घाट १४ KM का ट्रेक कर ज़ूम कार पार्किंग से उठा जोशीमठ 20 km प्रस्थान और रात्रि में विश्राम
15 जून जोशीमठ से औली होते ऋषिकेश २७१ KM शाम की आरती और रात को विश्राम
१६ जून ऋषिकेश से हरिद्वार होते दिली २२० kM, संध्या तक दिली और वह से रात्रि में ट्रेन लेकर भोपाल

तो कहाँ तो केवल हेमकुण्ड और फूलों की घाटी था और क्या क्या जुड़ गया ये दिखये, और जब हम वास्तव में निकलेंगे तो और क्या गुल खिलते है पढ़ते रहिये.

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