हेमकुण्ड बद्रीनाथ केदारनाथ यात्रा वृतान्त
भाग ३
जून ९, २०19
तो भक्तजनों quick रिकैप - हम निकले है 9 दिनी बद्रीनाथ हेमकुण्ड यात्रा पर आज यात्रा का तीसरा दिन है, दो दिन ट्रेन और सेल्फ ड्राइव कार यात्रा कर देर रात हम रूद्रप्रयाग पहुँच गए है और आज हमारा चोपता तुंगनाथ ट्रेक करते हुए पीपलकोटी पहुँचने का प्रोग्राम है.
जैसा की पिछले भाग के अंत में हमने बताया कि हमारे पास ३२ km का advantage था क्योंकि हमने कल शाम थोडा स्ट्रेच करते हुए श्रीनगर की बजाय रुद्रप्रयाग पहुँच के दम लिया था, सो उस advantage को और भुनाने के लिए हम सुबह जल्दी ही उठ गए और पांच सुबह जो gmvan के होटल रूम की बालकनी में आये तो भौंचके रह गए, बालकनी से प्रयाग का अद्भुत नज़ारा था, रात को चूँकि अँधेरा हो चूका था हमें इसका अहसास नहीं था, दो नदियाँ मन्दाकिनी और अलकनंदा इन्हें देखकर ऐसा लगता है मानो दो बहनें आपस में एक दूसरे को गले लगा रहीं हो।

ऐसा माना जाता है कि यहां संगीत उस्ताद नारद मुनि ने भगवान शिव की उपासना की थी और नारद जी को आर्शीवाद देने के लिए ही भगवान शिव ने रौद्र रूप में अवतार लिया था।
सोचिये ऐसा दृश्य आपके आँखों के सामने हो दो कौन नहीं अपने भाग्य को सराहेगा. मैप देखा तो हमारे अगली मंजिल, चोपता का रास्ता संगम पर स्थित नारद मंदिर होकर ही जाता है सो हमने जल्दी सामान पैक किया, GMVN से मिलने वाले कॉम्प्लीमेंट्री नाश्ते का मोह त्यागा और निकल पड़े क्योंकि आज हमें तुंगनाथ मह्देव के १० kms ट्रेक सहित १३० किलोमीटर कवर करने थे. पहला पड़ाव संगम पर स्थित नारद मंदिर का दर्शन कर चोपता, २४ किम और १० km आना जाना ट्रेक टू तुंगनाथ महादेव था.
अब देखिये सच्च कहते है की बुलावा आता है तो ही इन्सान कहीं किसी स्थान पर पहुँचता है, नारद मंदिर से दर्शन करके बहार निकले 7 बज चुके थे, चूँकि नाश्ता स्किप किया था रास्ते के लिए कुछ फ्रूटी केक चिप्स लेने की लिए छोटी सी दुकान से सामान लिया और उससे चोपता का रास्ता पूछा तो भाईसाहब ने एक तरफ को इशारा कर दिया पर ये उस दिशा से विपरीत था जो गूगल मैप बता रहा था, मैंने फिर कन्फर्म करने के लिए गूगल मैप का हवाला दिया तो उसने कहा वो रास्ता ठीक नहीं है आप इधर से जाओ और हमने गाड़ी बढ़ा दी.
उस और थोड़ी दूर आगे बढ़े, सामने sign बोर्ड था केदारनाथ ७२ km और चोपता ३५ km, पत्नी बोल उठी अरे केदारनाथ इतना पास और लोग चार धाम - चार धाम करते है, हम इतना पास आके केदारनाथ नहीं जायेंगे ? मैंने उन्हें समझाया कि ये दूरी जो लिखी है गौरी कुंड तक की है वहां से १४ km का ट्रेक है अगर हम आज ही ये चढ़ाई करेंगे और सुबह वहां से वापस नहीं निकले तो आगे की सारी सेटिंग बिगड़ जाएगी और वहां ऊपर भारी बर्फ और ठण्ड होगी और हमारे पास रहने की कोई बुकिंग नहीं है, यह सुनके उनके चेहरे पर उदासी छा गई अब प्रेयसी की उदासी कौन सहन कर सकता है उसके लिए तो लोग तारे भी तोड़ लाते हैं
सो मैंने कहा ओके हम फ़ोन पर बुकिंग की कोशिश करते है अगर वो मोड़ जहाँ से हमें chopta के लिए मुड़ना है तक यह कोशिश कामयाब हो जाती है तो हम केदारनाथ के लिए चल देंगे. उस समय तक ८ बज चुके थे रास्ता बहुत ही खूबसूरत हो चला था लेकिन खतरनाक क्योंकि सड़क को चार लेन कने के लिए जगह जगह से खोद रखा था.




बाबा भोलेनाथ का बुलावा आ चुका था, केदारनाथ में gmvn के कैंप इंचार्ज का फ़ोन नंबर गूगल द महान पर मिल गया था और उसने पाहिले तो हमारी लोकेशन पूछी फिर बोला आप फाटा पहुँच के कॉल करो मैं तभी आपको कन्फर्म करूंगा ACCOMODATION के बारे में, क्योंकि ऐसे कई लोग काल करते है और पहुँच नहीं पाते तो हमें लगा कि बात बन गई है और भोलेनाथ की जय बोलाकर केदारबाबा की और चल पड़े.
मैं चल तो पड़ा पर अभी भी सब कुछ भोले पर नहीं छोड़ रहा था मूढ़ इन्सान जो ठहरा मेरी डोरी तेरे हाथ की भावना आने में कई जन्म लगेंगे. हम इस बीच में gmvn के प्रबंधक को फ़ोन करके अपनी स्थिति बताते रहे लेकिन फाटा आते आते फ़ोन नेटवर्क गायब ही हो गया और कन्फर्मेशन लटक गई, फाटा वो जगह है जहाँ से हेलीकाप्टर द्वारा १०-१५ मिनट में बाबा के चरणों में पहुंचा जा सकता है, वहाँ बुकिंग के लिए पूछताछ की तो पता पड़ा कि ऑनलाइन एडवांस बुकिंग होती है, सो आगे चल पड़े लेकिन यहाँ से माथे पर चिंता की लकीरें गहरी होने लगी आगे कारो वाहनों की लम्बी लाइने लगी थी हम रेंगते रेंगते किसी तरह सोनप्रयाग बस स्टैंड पर पहुंचे आगे वाहनों की लम्बी लाइन लगी थी आगे का कुछ पता नहीं पड़ रहा था मैंने भावेश को कहा उतरकर आगे पूछे तो हमें और कितना जाना है और आगे लाइन क्यों नहीं बढ़ रही है पता पड़ा की आगे पार्किंग है लेकिन वो फुल है एक गाड़ी जाती है तो लाइन एक इंच खिसकती है, तब बगल में खड़े टैक्सी ड्राईवर ने सलाह दी की अगर आपको आज ही ऊपर जाना है तो आप यहीं कहीं गाड़ी लगाओ और सामान लेके पैदल जाओ आगे करीब १.५ km पर यात्रा रजिस्ट्रेशन केंद्र है और वहां .५ km पर जीप स्टेंड है जो आपको गौरी कुंड लेके जाएगी और वहां से आपकी १४ km की ट्रेकिंग चालू होगी, हमने सलाह पर तुरंत अमल किया और एक बहुत ही मुश्किल जगह में गाड़ी लगाई डिकी खोलके तीन छोटे पिठु बैग में एक दिन का जरुरी सामान, रेन कोटस लिए, यहाँ पर कैलाश यात्रा का अनुभव काम आया जिसमे हर पड़ाव पर गैर जरुरी सामान छोड़ते जाते थे, और चल पड़े कमर कसके पर इस सब में लगभग ११.३० बज चुके थे, कैम्प मेनेजर का फ़ोन नहीं लग नहीं रहा था या ये कहें की हमारे फ़ोन केवल कैमरा बन चुके थे क्योंकि यहाँ केवल हमारा कथित नाकारा पब्लिक सेक्टर का बीएसएनएल नेटवर्क ही था और हमरे पास बीएसएनएल की सिम नहीं थी, सो एक बात ध्यान में रखें पहाड़ो में जाते वक्त एक बीएसएनएल की अदद सिम और काफी मात्रा में कैश रखें, मोदी जी के डिजिटल के चक्कर में इस पूरी यात्रा में हम दो बार कैशलेस की अवस्था में फँस गए. सो हम भाग भाग के रजिस्ट्रेशन सेंटर पहुंचे हालाँकि हम उतराखंड की वेबसाइट से ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन करवाए थे लेकिन वो केवल बद्रीनाथ और हेमकुण्ड का था क्योंकि बाबा केदारनाथ सुबह आठ बजे से पाहिले तो हमारी लिस्ट में ही नहीं थे, रजिस्ट्रेशन खिड़की पर पहुंचे तो मालूम पड़ा की रजिस्ट्रेशन तो हो जायेगा लेकिन गौरी कुंड से आगे केवल दो बजे तक ही जाने दिया जायेगा और उसके बाद उन्ही को जाने दिया जायेगा जो जिनकी ऊपर रहने की व्यवस्था होगी. मैंने घडी देखी १२.४५ बज चूका था समय के खिलाफ जंग चालू हो गई, कैश भी खत्म होने पे थी एटीएम ढूंढा, मिला पर कैश नहीं थी , बगल में होटल वाले ने बताया ही कि एक बन्दा कार्ड स्वैप करके कुछ सेवा शुल्क काटके पैसे देता है सो मज़बूरी वश discounted १०००० ले लिया. गौरी कुंड जाने के लिए जीप स्टैंड अभी भी ०.५ km दूर था रास्ते में बहती मन्दाकिनी के मनोहारी दृश्यों पर ध्यान नहीं था बस धुन थी की गौरी कुंड पहुंचना है, दौड़ के जीप पकड़ी पर ये क्या जीप वाला आगे चले नहीं क्योंक उसकी एक सीट अभी खाली थी , और एक सीट वाला था नहीं सभी परिवार वाले थे, मैंने कहा भाई एक सीट के पैसे मेरे से ले लेना इस तरह राम राम करके गौरी कुंड पहुंचे. गौरी कुंड के संकरे और सीढीदार बाज़ार से गुजरते हुए जब हम यात्रा मार्ग के प्रवेश द्वार की और बढ़ रहे थे कुछ लोग ये कहते नीचे उत्तर रहे थे की आज के लिए यात्रा क्लोज हो गई जबकि अभी अभी केवल १.३० बजे थे मेरा दिल बैठ गया पर मैं प्रवेश द्वार की और बढ़ता रहा, बैरियर पर पुलिस वाला माइक पर यात्रा क्लोज हो गई की घोषणा कर रहा था उनका एक अधिकारी बगल में लोगों से घिरा खड़ा था मैंने किसी तरह जगह बनाकर उसे हमें आगे जाने देने का लिए निवेदन किया कि अभी तो केवल १.३० ही बजा है, उसका कहना था की ऊपर कितने लोग पहुँच है उसको देखके तय होता है की कब गेट बन्द किये जाएँ. अभी उसी को आगे जाने दिया जावेगा जिसके वहां रहने का कन्फर्म इंतजाम हो, तो मैंने कहा की हमारा तो है तो उसने लैटर माँगा हमने उसको हमारी मेनेजर से हुई बात के बारे में बताया और कहा की अब हमारे फ़ोन में नेटवर्क नहीं, उस भले आदमी ने अपना फ़ोन पकड़ा दिया बोला इससे लगाओ और मेरी बात कराओ, सामने वाले मेनेजर को हमने दृश्यम वाले अजय देवगन की तरह याद दिलाया कि हमने फलां फलाँ समय पर आपसे बात करी थी तो सुबह से की जाने वाली हमारी अजय देवगन वाली हेमरिंग काम कर गई और बन्दा मान गया और पुलिस अधिकारी को कन्फर्म कर दिया और हमें आगे जाने दिया गया. मैंने मन ही मन भोले बाबा की जय बुलाई.
सो अगर आपने प्रथम दो भाग पढ़े हो तो देखये क्या प्लान था और क्या क्या ट्विस्ट हो गए. निकले थे तुंगनाथ के लिए चल दिए केदारनाथ.
होइहि सोइ जो राम रचि राखा। को करि तर्क बढ़ावै साखा॥
अस कहि लगे जपन हरिनामा। गईं सती जहँ प्रभु सुखधामा॥
आगे का हाल अगले भाग में
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