हेमकुण्ड बद्रीनाथ केदारनाथ यात्रा वृतान्त
भाग दो
जून ८, 2019
यात्रा का दिन आ पहुंचा, निकलने से पाहिले हेमकुण्डस साहिब के मौसम के हॉल और यात्रा मार्ग की हालात की अपडेट ली, पता पड़ा की ऊपरी हिस्सों में भीषण बर्फ़बारी हुई है, बर्फ को काटकर हेमकुण्ड का रास्ता बनाया जा रहा है, NH7 पर मार्ग दोहरीकरण का काम चलने के कारण लम्बे लम्बे जैम लग रहे है. अभी पिछले साल ही कैलाश मानसरोवर यात्रा मी में इस्तेमाल ट्रेकिंग किट और अन्य आवश्यक सामग्री की चेक लिस्ट से मिलान कर सामान पैककर लिया
डी डे आ पहुंचा हमारी ट्रेन अपने समयनिष्ठता के इतिहास को दोहराते सही समय पर आ गई और हम भोपाल के एक बाहरी स्टेशन हबीबगंज से ट्रेन में सवार हो गए 15 मिनट में ट्रेन भोपाल पहुँच गई, मैं आराम से उपरी सीट पर पैर पसर चुके था पर ये क्या २० मिनिट हो गए गाड़ी वहीँ खड़ी थी जबकि स्टॉप केवल ५ मिनट का था, हमारी धुकधुकी चालू हो चुकी थी ५-७ मिनट बीतते न बीतते हम नीचे उत्तर आये, बाहर प्लेटफार्म पर हंगामा बरपा था, एक AC थ्री के कोच का AC नागपुर से पहले कहीं से ख़राब चल रहा था और उस कोच के यात्री ट्रेन को आगे न बढने रहे थे और बार बार चैन पुलिंग हो रही थी. और साहब करीब दो घंटे वहीँ खड़ी रही तो हमारी प्लानिंग को पहला पलीता लग चुका था. फिर रात को जब ट्रेन में सोने की कोशिश कर रहे थे ज़ूम कार वालों का फ़ोन आया की सर आपने जो टाटा टिअगो कार बुक करी थी वो अपने पिछले सफ़र से वापस नहीं आ पाई है, मेरा मन बैठ गया पाहिले तो ट्रेन लेट फिर ये, तभी अगले sentence में उसने कहा, हमने आपके लिए मारुती स्विफ्ट कार तैयार रखी है क्या आप सहमत है मैंने तुरंत हाँ भरी और चैन की साँस भरकर भगवान् को शुक्रिया अदा कर सो गया.
जून 9, 2019
ट्रेन २.३० घंटे विलम्ब से हज़रत निजामुदीन पहुंची और जो ज़ूम कार पिक अप कर हरिद्वार के लिए प्रस्थान ५.३० बजे करने वाले थे वो साढ़े सात बजे कर पाए और दिली का बाहरी ट्राफिक तो आप जानते ही है और मोदी नगर आते न आते हम ट्राफिक जैम में फँस चुके थे गूगल माता ने छोटी छोटी गलियों खेत खलिहानों से होते हुए डायवर्सन सुझाये इससे पाहिले हमने रोड साइड रूककर पंडित ढाबा से जमकर आलू गोभी मूली के पराठे उडाये और चाय पी, अब हम गंगा कैनाल रोड पर आ चुके थे बगल में गंगा कैनाल में कई जगह बच्चे जवान कूद कर धमाल मचा रहे थे और गर्मी को मात दे रहे थे मेरा भी मन कर रहा था कि कपड़े उतारकर कूद पडू पर समय इजाजत नहीं दे रहा था हम टारगेट से दो नहीं अब तीन घंटे से पिछड़ चुके थे. NH३३४ और ३४ को जोड़ने वाले हर जंक्शन पर ट्रैफिक जैम मिल रहा था गंगा कैनाल रोड भी ज्यादा चौड़ा भी नहीं था, हमने त्रस्त हो भावेश से विचार विमर्श किया, गूगल मैप देखे और आकाशवाणी भी हुई अभी इतने पाप इकठे नहीं हुए है कि हर की पैड़ी पे स्नान करें. सो तय पाया कि जैसा गूगल महाशय बता रहे है की NH३३४ छोडके हम ३४ पे आ जाएँ और बिजनौर नजीबाबाद कोटद्वार होते हुए सीधे श्रीनगर Uk पहुंचा जाये और उस पर तुरंत अमल हुआ और मुजफरनगर से पहले ही हमने गाड़ी NH१२अ, जो की NH३३४ और ३४ को जोड़ता है पे आ गये, हालाँकि यह रास्ता ३० km ज्यादा लम्बा था, हमारा निर्णय सही निकला, इस रास्ते पर बड़ा सुकून था हमने लंच स्किप करते हुए नजिबाबाद में इंधन भरते भरते फलाहार किया, गाने का जूस लिया और चलते रहे. डायवर्सन के बाद कोटद्वार का ११० किमि का रास्ता हमने १.३० घंटे में पूरा कर लिया और इस समय करीब २ बज चुके थे, इसमें इंधन भराने और रसाहार का समय भी शामिल है और हाँ ये भी उलेखनीय है कि ज़ूम कार की गाड़ियों में स्पीड गवर्नर ८० पर सेट रहता है, सो इतनी अच्छी सड़क पर भी हम खुला खेल फरुखाबादी नहीं खेल पा रहे थे. कोट्द्वार से पहाड़ी रास्ता चालू हो गया यहाँ से हमारी मंजिल श्रीनगर अभी भी १३८ किमि दूर थी और गूगल माता एक्सपेक्टेड arrival ६.२० बता रही थी. हमने गाड़ी का तो इंधन भर लिया थे पर हमारे पेट का इंधन इंडिकेटर रिज़र्व दिखा रहा था, कोटद्वार में लीचियों की भरमार थी, खाकर कुछ राहत महसूस हुई, कुछ ककड़ी ने भी सहारा दिया सो एक्सीलेटर दबाये रखा.
ये ध्यान रखिये अगर आप अपने वाहन से जा रह हैं तो आपको उतराखंड सरकार वाहन कर देना होता है, परन्तु हमें सीमा पर ऐसी कोई चौकी नज़र नहीं आई.
चढ़ाई और घुमावदार रास्तो के कारण औसत गति २०-२५ ही मिल पा रही थी, करीब ७० km चल चुके थे सतपुली क्रास करने के बाद डोवाल गाँव के मुहाने पर एक छोटा रेस्टोरेंट सेवन हेवन दिखा, पेट के घोड़े हिनहिनाये, गाड़ी भी गरम हो रही थी सो हम रुक गए, रेस्तौरेंट सच में ही सेवेन हेवन था एक छोटी सी स्ट्रीम बह रही थी हम पैर डाल के बैठ गए, कुर्सियां पानी में डूबी थी, गरमा गरम पराठे थे, बेचलर्स की प्यारी मैगी थी और हाँ चाय तो थी ही. उठने को मन नहीं हो रहा था पर ४.४५ हो रहे थे करीब ७० km और चलना था, सो निकल पड़े. रास्ता खुबसूरत हो चला था सूर्य डूबते हुए मस्त नज़ारे दिखा रह था नीचे कोई नयार नदी बह रही थी. लीजिये इसीकी कमी थी कार की छत पर तड़ तड़ ओले गिरने लगे बारिश होने लगी पर ज्यादा नहीं चली और या तो बन्द हो गई या हम आगे निकल आये. करीब 7 बजे हम श्रीनगर के जोड़ पर पहुंच गए. चौराहे पर खड़े पुलिस वालों से वाहन कर के बारे में पुछा तो बोले rto बन्द हो गया होगा तो हमने पुछा टैक्स कैसे चुकाएं तो उन्होंने कहा मुसुकुराए आप उतराखंड में है और ये मुस्कुराना हमें कितना भरी पड़ा आगे बतायेगे.
हमें अभी भी उजाला दिख रहा था और हमारा अगला पड़ाव केवल ३२ km था तो हमने सोचा चले चलते है और भावेश को बोला की GMVN रुद्रप्रयाग का फ़ोन नंबर गूगल करो और उसको पूछो की कुछ रूमखाली हो तो, रूम खाली थे उन्होंने बोला आ जाइये. अब हमने निश्चिन्त होके गाड़ी चलाने पर ध्यान दिया क्योंकि यह मुख्य हाईवे था मार्ग दोहरीकरण का कम चल रहा था इसलिए पूरा खुदा हुआ था कभी – कभी ऐसा लगा कि गलती कर दी यात्रा कंटिन्यू करके, धीरे अँधेरा भी होने लगा सामने से आने वाले वाहन अभी पश्चिमी देशों के चालको जैसे प्रशिक्षित या उदार नहीं थे की वे डिपर का उपयोग करें या आपके निकलने का इंतजार करें सो राम राम करके ८.३० बजे हम GMVN रुद्रप्रयाग पहुँच गए, चेक इन करने के टाइम ही उसने बताया की अगर खाना खाना हो तो अभी से आर्डर कर दो, और बेसिक खाना मिलेगा लक्सरी मत एक्स्पेक्ट करिए सो बेंगन का भरता दाल रोटी और चांवल का आर्डर दे दिया और ९.३० का टाइम दे दिया. रूम में पहुँच कर नहाया धोया और खाने के लिए पहुंचे, खाना गरम ताजा और स्वादिष्ट था, वेटर ने बताया ब्रेकफास्ट कॉम्प्लीमेंट्री है ८ बजे बुफ़े लग जायेगा पर हमारा तो इससे पहले ही तुंगनाथ के लिए निकल जाने का प्रोग्राम था, सो हम रूम जाके सारे दिन की थकावट मिटाने के लिए सो गए.
आज का सफ़र कुल सफ़र ४०४ kms रूट दिलीर - मुजफरनगर से थोडा पाहिले राईट टर्न- बिजनौर-नजिबाबाद - कोटद्वार – श्रीनगर -रुद्रप्रयाग
आज का सफ़र संतोषजनक रहा प्रारंभिक झटकों के बावजूद टारगेट से ३२ km ज्यादा अचीव कर लिया पर हरिद्वार में स्नान मिस किया. आपका क्या विचार है.
सो कैसा लगा ट्विस्ट. सो आगे की की कथा भाग तीन में. आगे और भी ट्विस्ट है, इंतजार करिए




Comments
Post a Comment